Skip to main content

400 पौधा वितरण

 सच्चे #शिक्षक वे हैं जो हमें अपने लिए सोचने में मदद करते हैं। 











#बच्चों के अंदर #वृक्ष प्रेम होना बहुत जरूरी।


आज शिक्षक दिवस के अवसर पर #सरस्वती पब्लिक स्कूल बराह में उपस्थित होने का मौका मिला और उपस्थित बच्चों के बीच शामिल होने का मौका मिला। इस अवसर पर स्कूल के संस्थापक अनिल सर और प्रधानाध्यापक एवं संचालक मुकुंद सर के द्वारा सम्मान प्राप्त हुआ। मैं इसके लिए तहे दिल से आभार व्यक्त करता हूं। 


आज इस अवसर #Brothers of Bihar के तरफ पर 400 पौधा बच्चों के बीच वितरण किया गया। जिसमें इस स्कूल के सभी शिक्षक एवं सभी बच्चे बहुत ही उत्साह पूर्वक भाग लिये और वृक्ष बचाने हेतु संकल्प लिए। 


मुझे बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि इस स्कूल में पर्यावरण हेतु बच्चे बहुत जागरूक हैं साथ ही सभी बच्चों में भिन्न भिन्न ऊंच कोटि की प्रतिभा भरी है। 


साथ में उपस्थित हमारे नौनित दुबे भईया से कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। वहीं मेरे साथी ओशो मनीष भाई उपस्थित रहे। 


#brothersofbihar #teachersday #teachers #environmentalawareness #entertainment #viralchallenge #viral #patna #Bihar #BiharPolitics #BiharNews #police #BiharPolice #school #schooldays

Comments

Popular posts from this blog

बुजुर्ग सिर्फ सीनियर सिटीजन नहीं युवा पीढ़ी के बीच के कनेक्टिंग लिंक (संबंधसूत्र) हैं : डॉ० ममतामयी प्रियदर्शिनी

 बुजुर्ग  सिर्फ सीनियर सिटीजन नहीं  युवा पीढ़ी के बीच के कनेक्टिंग लिंक (संबंधसूत्र) हैं :  डॉ० ममतामयी प्रियदर्शिनी मार्गदर्शक सम्मान सह धरोहर संरक्षण अभियान   जिन्हें हम आजकल सिर्फ सीनियर सिटीजन समझने लगे हैं, वो दरअसल हमारे पूर्वजों और युवा पीढ़ी के बीच के कनेक्टिंग लिंक (संबंधसूत्र) हैं। ये सम्माननीय बुजुर्ग ही हमारे मार्गदर्शक हैं तथा पूर्वजों के धरोहर, थाती, सभ्यता एवम संस्कृति के संवाहक हैं।  सम्मान  जिससे हमारी आने वाली पीढ़ी प्रेरणा ले सके और अपनी सभ्यता संस्कृति को प्रायोगिक तौर पर समझ सके उपयुक्त बाते डॉ ० ममतामयी प्रियदर्शिनी  ने "गंभीर बाबा मंदिर" के प्रांगण में मार्गदर्शक सम्मान आयोजित कार्यक्रम में कही! उनहोंने कहा की बुजुर्ग किसी परिवार, सामाजऔर देश के लिए एक चटान के तरह होते है!उन्होंने कहा की सामान्यतः दो प्रकार के धरोहरों की बात हमेशा होती है, ऐतिहासिक और पौराणिक धरोहर, लेकिन मेरा मानना है एक महत्वपूर्ण जीवित धरोहर हमारे बीच हैं, हमारे बुजुर्ग lजो थोड़े नजरंदाज हो रहे हैं। अतः इसी साल डॉ० ममतमयी प्रियदर्शिनी ने  अगस्त ...
 पूरे देश में यह लागू होनी चाहिए। आवारा कुत्तों के काटने से प्रतिदिन लोगों को जाती है जाने।  सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के आवारा कुत्तों को शेल्टर में भेजने और इस काम में बाधा उत्पन्न करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने का जो आदेश दिया है, वो भले ही व्यावहारिक रूप से बहुत प्रभावी न हो लेकिन सांकेतिक रूप से इसका महत्व बहुत बड़ा है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस आदेश से दिखाया कि वो आम जनता की समस्याओं के प्रति सरकार से ज्यादा जागरूक और चिंतित है तथा वह भी इन पर्यावरणवादी पशुप्रेमियों की असली हकीकत से वाकिफ है। लगभग हर महीने और कभी कभी तो हर सप्ताह किसी बालक बालिका या बुजुर्ग की इन आवारा कुत्तों के नोचने के कारण मृत्यु की खबर जब आम हो चुकी है। सुबह की सैर करने वाले या दिहाड़ी नौकरी की मजबूरियों के चलते सुबह जल्दी निकलने वाले या रात में देर में लौटने वाले ग्रामीण कस्बाई छोटे तबके के लोग इन आवारा कुत्तों के भय में जी रहे हैं तब सुप्रीम कोर्ट का एक आदेश दिखा गया कि उसे वास्तव में फर्जी पशुप्रेमियों से ज्यादा एक आम आदमी की जान की चिंता है। रेबीज एक लाइलाज बीमारी है जो कुत्ते के का...

अपनों ने अपने को लूटा गैरो में कहां दम था, किस्ती थी वहां डूबी जहां कुर्सी की चाह धर्म था ‼️

 विनम्र श्रद्धांजलि 🙏  अपनों ने अपने को लूटा गैरो में कहां दम था, किस्ती थी वहां डूबी जहां कुर्सी की चाह धर्म था ‼️ आपके जैसा ना कोई था, ना कोई हुआ है और ना कोई होगा। इस स्वार्थी दुनिया ने आपके नाम का स्वार्थ साधा है और साध रहा है। मैं तो आपसे कभी रु बा रु नहीं हुआ, परंतु आपकी वीरता की कहानी अपने पूर्वजों से सुना हूं। मैं आपकी तस्वीर जब भी देखता हूं और आपके बारे में जब भी चर्चा होती है तो यही सोचता हूं की कास आप हमेशा हम सभी के बीच होते। हाला की आपकी आत्माएं आज भी हमारे साथ रहती है। आप अमर हैं और अमर ही रहेंगे। जब भी आपके नाम पर लोग अपनी राजनीति रोटी सेंकते है तो मुझे बहुत ठेस पहुंचता है और हमेशा मैं उस व्यक्ति का विरोधी रहता हूं। आज आपके नाम पर कई संगठन तो बनाएं गए परंतु किसी संगठन ने आपके न्याय के लिए नहीं लड़ रहा है बस वह समाज का शोषण और अपनी राजनीति रोटी सेंकने में लगा है। आज लोग आपके नाम पर भीड़ इक्कठा करते हैं और अपनी बाहुबल को दिखाकर समाज का शोषण कर बस अपने आप को निखारने में लगे हैं। आज हमारे समाज को कई भागों में तोड़ दिया गया है जिसे अब जोड़ना बहुत मुस्कील हो गया है। ...