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 पूरे देश में यह लागू होनी चाहिए। आवारा कुत्तों के काटने से प्रतिदिन लोगों को जाती है जाने। 



सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के आवारा कुत्तों को शेल्टर में भेजने और इस काम में बाधा उत्पन्न करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने का जो आदेश दिया है, वो भले ही व्यावहारिक रूप से बहुत प्रभावी न हो लेकिन सांकेतिक रूप से इसका महत्व बहुत बड़ा है।


दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस आदेश से दिखाया कि वो आम जनता की समस्याओं के प्रति सरकार से ज्यादा जागरूक और चिंतित है तथा वह भी इन पर्यावरणवादी पशुप्रेमियों की असली हकीकत से वाकिफ है।


लगभग हर महीने और कभी कभी तो हर सप्ताह किसी बालक बालिका या बुजुर्ग की इन आवारा कुत्तों के नोचने के कारण मृत्यु की खबर जब आम हो चुकी है।


सुबह की सैर करने वाले या दिहाड़ी नौकरी की मजबूरियों के चलते सुबह जल्दी निकलने वाले या रात में देर में लौटने वाले ग्रामीण कस्बाई छोटे तबके के लोग इन आवारा कुत्तों के भय में जी रहे हैं तब सुप्रीम कोर्ट का एक आदेश दिखा गया कि उसे वास्तव में फर्जी पशुप्रेमियों से ज्यादा एक आम आदमी की जान की चिंता है।


रेबीज एक लाइलाज बीमारी है जो कुत्ते के काटने या नाखून लगने या चाटने से भी हो सकती है।इसका इलाज सिवा वैक्सीन के कुछ नहीं है।अगर समय पर सही वैक्सीन न मिली तो रेबीज के मरीज की बहुत दर्दनाक मौत होती है।


इतनी दर्दनाक कि जो एक बार रेबीज के मरीज को उसके अंतिम समय में देख ले तो वो दुनिया के हर कुत्ता प्रेमी से घृणा कर बैठेगा।


रेबीज के इंजेक्शन अक्सर सरकारी अस्पताल में समय पर नहीं मिलते और प्राइवेट में एक वैक्सीन चार साढ़े चार सौ की पड़ती है और पांच बार लगती है।


कारों में बैठे कुत्ता प्रेमी समझते नहीं हैं कि कुत्ते कितनी बड़ी समस्या हो चुके हैं। हम तो कहते हैं कि सभी आवारा कुत्तों को उन रोड पर उतरे कुत्तों प्रेमियों के घर छोड़ दिया जाए। यह सब ढोंगी पशु प्रेमी है। सरकार को यह आंदोलन करने वालों पर भी कार्यवाही करनी चाहिए और इन सभी को उन आवारा कुत्तों के साथ सेल्टर होम में डाल देना चाहिए। 


गया से प्रेम नहीं तो कुत्तों से प्रेम हो गया, यह सब खाली ढोंग है।। सब के घर के बुजुर्ग वृद्धाश्रम हैं और उनकी सेवा नहीं हो रही है तो इन आवारा कुत्तों के लिए ढोंग कर रहे हैं। 


Narendra Modi PMO India News18 Bihar Aaj Tak Nitish Kumar Amit Kumar  Nitin Gadkari 

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