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Showing posts from November, 2021

यू- हम फाउंडेशन का शुभारंभ किया गया, वैशाली की धरती से। पूरे विश्व में गणतंत्र की जननी, वैशाली की धरती पर Statue of World Republic की स्थापना अनिवार्य है: डॉ० ममतामयी प्रियदर्शिनी

 यू- हम फाउंडेशन का शुभारंभ किया गया, वैशाली की धरती से। पूरे विश्व में गणतंत्र की जननी, वैशाली की धरती पर Statue of World Republic की स्थापना अनिवार्य है:  डॉ० ममतामयी प्रियदर्शिनी डॉ० ममतामयी प्रियदर्शिनी ने वैशाली के कमान छपरा में अवस्थित "चतुर्मुख महादेव मंदिर" परिसर में आयोजित "मार्गदर्शक सम्मान सह धरोहर संरक्षण अभियान" के दौरान कहा कि किसी भी राष्ट्र की धरोहरें उसकी बुनियाद होती हैं। इसीलिए  हमे अपने ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित, संवर्धित और प्रचारित करने की बहुत आवश्यकता है। डॉ० प्रियदर्शिनी ने आगे कहा कि वैशाली की धरती धरोहरों की नगरी रही है, जिसके संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रयास करने की सख्त जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि वैशाली की धरती पर ईसा पूर्व विश्व के प्रथम गणतंत्र (Republic) की शुरुआत हुई थी। इसीलिए डॉ० ममतामयी प्रियदर्शिनी ने आज, 14 नवंबर 2021 को स्थानीय लोगो के साथ मिलकर वैशाली की ऐतिहासिक धरती पर विश्व के पहले गणतंत्र की प्रतीकात्मक प्रतिमा, यानी "Statue of World Republic" बनाने की मांग पोस्टर का अनवरण का किया। उन...

बुजुर्ग सिर्फ सीनियर सिटीजन नहीं युवा पीढ़ी के बीच के कनेक्टिंग लिंक (संबंधसूत्र) हैं : डॉ० ममतामयी प्रियदर्शिनी

 बुजुर्ग  सिर्फ सीनियर सिटीजन नहीं  युवा पीढ़ी के बीच के कनेक्टिंग लिंक (संबंधसूत्र) हैं :  डॉ० ममतामयी प्रियदर्शिनी मार्गदर्शक सम्मान सह धरोहर संरक्षण अभियान   जिन्हें हम आजकल सिर्फ सीनियर सिटीजन समझने लगे हैं, वो दरअसल हमारे पूर्वजों और युवा पीढ़ी के बीच के कनेक्टिंग लिंक (संबंधसूत्र) हैं। ये सम्माननीय बुजुर्ग ही हमारे मार्गदर्शक हैं तथा पूर्वजों के धरोहर, थाती, सभ्यता एवम संस्कृति के संवाहक हैं।  सम्मान  जिससे हमारी आने वाली पीढ़ी प्रेरणा ले सके और अपनी सभ्यता संस्कृति को प्रायोगिक तौर पर समझ सके उपयुक्त बाते डॉ ० ममतामयी प्रियदर्शिनी  ने "गंभीर बाबा मंदिर" के प्रांगण में मार्गदर्शक सम्मान आयोजित कार्यक्रम में कही! उनहोंने कहा की बुजुर्ग किसी परिवार, सामाजऔर देश के लिए एक चटान के तरह होते है!उन्होंने कहा की सामान्यतः दो प्रकार के धरोहरों की बात हमेशा होती है, ऐतिहासिक और पौराणिक धरोहर, लेकिन मेरा मानना है एक महत्वपूर्ण जीवित धरोहर हमारे बीच हैं, हमारे बुजुर्ग lजो थोड़े नजरंदाज हो रहे हैं। अतः इसी साल डॉ० ममतमयी प्रियदर्शिनी ने  अगस्त ...

बिहटा, डिहरी नदी पर उदयाचलगामी सूर्य को अर्घ्य के साथ छठ महापर्व समपन्न

 बिहटा, डिहरी नदी पर उदयाचलगामी सूर्य को अर्घ्य के साथ छठ महापर्व समपन्न बिहार के पटना जिले के बिहटा प्रखंड अंतर्गत  कैलाश धाम डिहरी नदी में सैकड़ों व्रतियों ने उदयीमान सुर्य को आज अपना दुसरा अध्र्य अर्पित किया। नदी के चारों तरफ मानो श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पडा था। कुछ इस हद तक कि मानों तील रखने भर की जगह भी खाली नहीं बचा हो।   अपना अर्घ्य अर्पण कर छठ व्रती पोखरे से दंडवत करते हुये सुर्य मंदिर पहुंचते हैं  भगवान भाष्कर के दर्शन करते हैं ।  जहां छठ व्रती  उदयाचल , मध्याचल एवं अस्ताचलगामी  सूर्य को पवित्र सुर्यकुण्ड मे   अपना अर्घ्य अर्पित करते हैं ।  साथ हीं डिहरी गांव के युवाओं ने छठ महापर्व में श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की दिक्कत ना हो इसके लिए काफी तत्पर दिखे।