प्रजातंत्र की धरती, भगवान बुद्ध की धरती बिहार आखिर क्यों व्यंग का पर्याय बन गया है। आज बिहार के लोगों को अन्य राज्यों में अहमियत घटती क्यों जा रही है, जबकि बिहार के लोग यदि दूसरे राज्यों में जाना बंद कर दे तो मुझे लगता है, उन राज्यों का विकास का सारा मार्ग बंद हो जाएगा। आज बिहार मजदूरों की हालत पर हम जरा फोकस डालेंगे- बिहार के मजदूर अपने रोजी रोटी के लिए दूसरे राज्यों में काम करने जाते हैं, वहां मजदूरी करते हैं, किसी फैक्ट्रियों में काम करते हैं, किसी के घर पर काम करते हैं, किसी के खेतों में काम करते हैं, कोई नौकरी करता है, कोई बड़े-बड़े पदों पर आसीन है। इसमें जो बड़े-बड़े पद पर आसीन हैं उनके बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा। परंतु जो मजदूरी करने जाते हैं, उनके लिए मैं एक बात जरूर कहूंगा, कि यदि यह सभी मजदूर अपने राज्य वापस हो जाएं तो मुझे लगता है कि भारत के तमाम राज्यो के लोग त्राहिमाम करने लगेंगे। हाला कि इसमें कुछ मजदूरों कि भी गलती है जो अपने गांव में मजदूरी नहीं करते हैं बिहार में मजदूरी करने में शर्म आती है और यही कार्य अन्य राज्यों में जाकर के करते है...