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अपनों ने अपने को लूटा गैरो में कहां दम था, किस्ती थी वहां डूबी जहां कुर्सी की चाह धर्म था ‼️

 विनम्र श्रद्धांजलि 🙏 

अपनों ने अपने को लूटा गैरो में कहां दम था, किस्ती थी वहां डूबी जहां कुर्सी की चाह धर्म था ‼️



आपके जैसा ना कोई था, ना कोई हुआ है और ना कोई होगा। इस स्वार्थी दुनिया ने आपके नाम का स्वार्थ साधा है और साध रहा है। मैं तो आपसे कभी रु बा रु नहीं हुआ, परंतु आपकी वीरता की कहानी अपने पूर्वजों से सुना हूं। मैं आपकी तस्वीर जब भी देखता हूं और आपके बारे में जब भी चर्चा होती है तो यही सोचता हूं की कास आप हमेशा हम सभी के बीच होते। हाला की आपकी आत्माएं आज भी हमारे साथ रहती है। आप अमर हैं और अमर ही रहेंगे। जब भी आपके नाम पर लोग अपनी राजनीति रोटी सेंकते है तो मुझे बहुत ठेस पहुंचता है और हमेशा मैं उस व्यक्ति का विरोधी रहता हूं। आज आपके नाम पर कई संगठन तो बनाएं गए परंतु किसी संगठन ने आपके न्याय के लिए नहीं लड़ रहा है बस वह समाज का शोषण और अपनी राजनीति रोटी सेंकने में लगा है। आज लोग आपके नाम पर भीड़ इक्कठा करते हैं और अपनी बाहुबल को दिखाकर समाज का शोषण कर बस अपने आप को निखारने में लगे हैं। आज हमारे समाज को कई भागों में तोड़ दिया गया है जिसे अब जोड़ना बहुत मुस्कील हो गया है। बस यह आंखे यही टकटकी लगाकर बैठी है की कब आप जैसा महापुरुष इस धरती पर आयेगा और पुनः इस बिखरे समाज को एकजुट करेगा। मेरे इस शरीर का रोम रोम आपके बलिदान का ऋणी है। आज आपके बाड़े में लिख भी रहा हूं तो मेरे रोंगटे खरे हो गई है । सही मायने में आपका कर्तव्य, आपकी ईमानदारी, आपका त्याग, आपका तपस्या जन्म जन्म तक मेरे धड़कनों में धड़कते रहेगा। 

आप नक्सलियों से नहीं लड़े होते तो हमे लगता है कि हमारा समाज पलायन कर गया होता और कई गांव से लोग अपनी संपति और आबरू को बचाने के लिए दर दर को भटकते रहते। बाबा आप सही मायने में योद्धा थे और नक्सलियों के चंगुल से बिहार को आजाद कराए थे। जहां प्रशासन भी जाने से डरता था वहां पर जा कर उस गांव की बेटियों की शादी करते थे जब तक शादी सम्पन्न नहीं हो जाता था आप उस गांव और पूरे परिवार की सुरक्षा हेतु पूरी रात जागते थे। आपने भोजपुर से चलकर औरंगाबाद, जहानाबाद, अरवल, गया जी, पटना, मुजफ्फरपुर इत्यादि कई जिलों के लोग को नक्सलियों से बचाएं और सुरक्षा प्रदान किए और निजात दिलाएं।


आज हमें खेद है और मैं शर्मिंदा हूं कि आपके हत्यारों को सजा नहीं मिला और समाज के बड़े कुर्सी पर बैठे लोग अपने कुर्सी को और निखारने के लिए समाज का शोषण कर रहा है और हम उसके शोषण हो रहे हैं। मैं जानता हूं कि कुर्सी वाले लोग आपको श्रद्धांजलि तक नहीं देंगे। आज हमें देखने वाला हमारी हक की लड़ाई लड़ने वाला कोई नहीं है। 


मैं सभी लोग से अपील करता हूं कि आज हमारे वीर ब्रह्मेश्वर मुखिया जी के लिए जहां हैं वहीं से 2 मिनट का मौन रखे और मुखिया जी के तस्वीर को अपने घरों में जरूर लगाएं। 🙏


विनम्र श्रद्धांजलि 🙏🙏🙏


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