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NH139 पटना से औरंगाबाद भाया अरवल तीन जिला को जोड़ने वाली यह रोड की चौड़ीकरण बहुत जरुरी है। यह रोड को चार लेन जल्द से जल्द करने का आग्रह करता हूं।

 #NH139 पटना से औरंगाबाद भाया अरवल तीन जिला को जोड़ने वाली यह रोड की चौड़ीकरण बहुत जरुरी है। यह रोड को चार लेन जल्द से जल्द करने का आग्रह करता हूं। 








उत्तरी बिहार और दक्षिणी बिहार को जोड़ने वाली रोड  ही आपकी जिंदगी को चलाने में एक महत्वपूर्ण रोल निभाता है उसे रोड का नाम है #NH139 जो पटना से अरवल होते हुए औरंगाबाद को जाता है। 


यह वही रोड है जो पटना को जीटी रोड से जोड़ता है, पूरे देश से जो भी ट्रक भर के कंटेनर आते हैं, चाहे वह टू व्हीलर हो, फोर व्हीलर हो या आपके पहनने के कपड़े, दवाइयां, घर बनाने के लिए स्टील,सीमेंट, बालू और  पटना में जितने भी शॉपिंग माल है उन सब में सजाने के लिए जो भी सामान है इसी हाइवे के जरिए प्रवेश करता है, क्योंकि आप जानते हैं की  पटना में कोई भी सामान मैन्युफैक्चर नहीं होता ।


और जब इस  #NH139 के जरिए गाड़ी जीटी रोड को छोड़ औरंगाबाद से आपके पटना के तरफ मुड़ती है तो आपके बिहार के भाइयों को रौंदते हुए ही पटना में पहुंचती है, क्योंकि  इस उच्च यातायात रोड की चौड़ाई बहुत कम है!


याद रखिएगा पटना में आप जो भी सामान इस्तेमाल करते हैं तो उसमें लोगों का खून सना हुआ है, हर रोज इस सड़क पर कितने ही लोग अपनी जिंदगी से हाथ धोते हैं, कितने ही बच्चे अनाथ हो जाते हैं, कितने ही मां बाप का घर सुना हो जाता है ! 


आपको  यह अकड़ा  पता भी नहीं होगा !!!!


 पटना - औरंगाबाद 2 लेन #NH139  सड़क का रंग कला नहीं लाल है, यहां के सड़कों पर गाड़ी नहीं मौत दौड़ती है !!


#NH139 भारतीय सड़कों का प्रमाण। 


आइए भारतीय राजनीतिज्ञों और अधिकारियों को जमीनी हकीकत का स्वाद चखने दें। 


मुझे यह लिखते हुए शर्म आ रही है। 


#NH139 दुनिया की सबसे व्यस्ततम सड़क है, जिसमें भारी यातायात है, फिर भी यह पूरी तरह से सिंगल और खतरनाक है।


दूसरी जाम लगने का कारण यह है 👇

बालू और ट्रक की आंख मिचौली:- महाजाम से त्राहिमाम करती जनता को नहीं मिल रहा निजात,

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*बालू और ट्रक लोडिंग के खेल से परेशान जनता को महाजाम की त्रासदी से  नहीं मिल रही निजात,  भगवान भरोसे जनता को, त्राहिमान करती यातायात व्यवस्था से आम आदमी आखिर कहां जाए?*


बिहार - झारखंड के बंटवारे के बाद बिहार में लेदे के बालू ही बची थी। वह भी सबसे महत्वपूर्ण सोन की बालू को उच्च कोटि की बालू माना जाता है।जोकि सोन नदी की सोना बालू हो चुकी है। बिहटा से भाया, पालीगंज और अरवल से औरंगाबाद तक स्टेट  और नेशनल हाईवे की जो दुर्गति बालू और बालू लदे ट्रकों को वजह से हो रही वह शब्दों भी बया करना कठिन हो गया है। आय दिन कहीं न कहीं महाजाम की भयावह स्थिति बनी हुई रहती है। सड़कों पर रेंगती हजारों बालू लदे ट्रकों की अनियंत्रित आवाजाही और अनियंत्रित पार्किंग की वजह से भयावह स्थिति उत्पन्न हो गई है। कब कहां महाजाम लग जाए कहना मुश्किल है। 

          बताते चलें कि महाजाम की ऐसी भयावह स्थिति आज नई नहीं हुई यह स्थिति लगातार कई महीनों से निरंतर चलते आ रहे हैं। पटना के बाद नौबतपुर, बिक्रम, बिहटा, दुल्हिन बाजार, पालीगंज से महाबलीपुर, प्रसादी इंग्लिश, अरवल, बैदराबाद, मेहंदिया, कलेर, दाऊदनगर तक यूं कहे यह शीलशिला औरंगाबाद या सोन नदी के पश्चिमी इलाके हो दोनों तरफ ऐसी ही भयावह स्थिति महाजाम की बनी हुई है।     


 वहीं देखा जाए तो पटना जिले में सबसे ज्यादा सड़क जाम की स्थिति बिक्रम, दुल्हिन बाजार , और पालीगंज के साथ सोन नदी के तटवर्तीय इलाके जैसे बिहटा, मनेर के बीच कुछ अधिक ही माहाजाम से जूझती जनता त्राहिमाम करती हुई दिखाई देती है। 


अब सवाल यह उठता है कि आखिर क्यों सड़कों पर महाजाम की स्थिति बालू लदे ट्रक से हो रही है? हम मानते हैं कि यह राज्य सरकार की राजस्व का एक जरिया है। परन्तु अब सवाल यह उठता है कि  क्या इसे नियंत्रित नहीं किया जा सकता है ? क्या यह यह समस्या इतनी बड़ी और विकराल हो चुकी है कि 


    हर दिन कहीं न कहीं महाजाम की स्थिति बनी रहती है। जाम कहीं लगे पिसती तो आम जनता ही न। आज दुल्हिन बाजार लगी है, कल पालीगंज लगी थी फिर कल लगेगी, परसो बिक्रम लगी थी फिर लगेगी, यह शीलाशिला चलती रहेगी, चलती रहेगी? आम जनता पिसती रहेगी पिसती रहेगी? आखिर महाजाम से निजता कौन दिखायेगा?  सोन नदी की बालू और बालू लदे ट्रकों से लगने वाले महाजाम की समस्या एक बहुत बड़ा त्रासदी बन चुका है या यूं दूसरे शब्दों में कहे कि अभिशाप बन चुका है?

 

पटना से सारण, वैशाली, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण व पश्चिमी चंपारण का सीधा संपर्क हो जाएगा। उत्तर बिहार के प्रमुख पर्यटक स्थलों वैशाली, लौरिया व केसरिया को भी संपर्कता प्रदान होगी। इस रूट से वाल्मीकिनगर टाइगर प्रोजेक्ट की पटना से कनेक्टिविटी भी बढ़ेगी।


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