वक्त से पहले गर्मी के तीखे तेवर और हमारी तैयारी,इस वर्ष भी बांटे जाएंगे मुफ़्त पौधे। गर्मी का समय से पहले आना और तापमान का अधिक रहना अब 'न्यू नॉर्मल', यानी नई सामान्य स्थिति बनती जा रही है। बिहार का आलम यह है कि अभी से ही तापमान के तेवर दिखने लगा है। मौसम विभाग के मुताबिक, वर्ष 2024 भारत के इतिहास का सबसे गर्म साल। मार्च व अप्रैल में भी सामान्य से अधिक तापमान रहने और सामान्य से अधिक दिनों तक लू चलने का अनुमान लगाया गया है, जो गर्मी के लिहाज से एक और मुश्किल साल का संकेत है। जाहिर है, नई परिस्थिति से निपटने के लिए हमें त्रिआयामी प्रयास करने होंगे।सबसे पहले, सभी शहरों, जिलों व राज्यों को वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित हीट एक्शन प्लान बनाने चाहिए। लगभग 97 प्रतिशत मौजूदा हीट एक्शन प्लान में उच्च तापमान से जुड़े जोखिम का विस्तृत आकलन नहीं किया गया है, जैसे कि किसी शहर में प्राथमिकता के आधार पर काम करने की जरूरत वाले वाडाँ अनुमान को चिह्नित नहीं किया गया है। भीषण गर्मी वाली जगहों (हॉट स्पॉट), शहरी निर्माण, ग्रीन कवर (हरियाली) के साथ-साथ सामाजिक-आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधित खतरों के आधार पर सरकारों को अपनी प्राथमिकता तय करनी होगी। भीषण गर्मी के अनुकूल बनने के लिए परखे हुए विस्तृत उपायों को अपनाने और आर्थिक मदद की व्यवस्था मजबूत बनाने की भी जरूरत है। गर्मी से बचाने की रणनीतियां प्रभावी रहें, इसके लिए जरूरी है कि हीट एक्शन प्लान स्थानीय संदर्भ में उपयोगी समाधानों- जैसे शहरी हरियाली, स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार, समय-पूर्व चेतावनी और छत को ठंडा रखने आदि- को अपनाने के लिए संभावित वित्त-पोषण की स्पष्ट जानकारी भी उपलब्ध कराए। इसके लिए केंद्र सरकार की अमृत और मनरेगा जैसी योजनाओं या शहरों के व्यावसायिक संस्थानों के कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व होमौसम विभाग के संकेत हैं कि तैयारियों को हम अपनी मजबूत करने के लिए तेज गर्मी शुरू होने का इंतजार नहीं कर सकते। राज्य सरकारें लू को 'स्थानीय संदर्भ' में आपदा मान भी लेती हैं, तब भी वे कुल डिजास्टर रिस्पांस फंड का सिर्फ 10 प्रतिशत हिस्सा खर्च कर सकती हैं। ऐसे में, गर्मी के कारण काम छोड़ने को मजबूर होने वाले लोगों, विशेष रूप से खुली जगह में काम करने वाले श्रमिकों की आजीविका को बचाने के लिए आर्थिक मदद अनिवार्य है। बीते साल हमने 18 हज़ार से अधिक पौधा लगवाया था और बहुत से लोगों ने ग्रीन विलेज का निर्माण में अहम भूमिका निभाई थी। ऐसे प्रयासों को और अधिक विस्तार देना चाहिए। जिसमें हमे राज्य सरकार और तमाम जनप्रतिनिधियों और जनता से सहयोग की जरूरत है। तमाम नागरिकों से अनुरोध है कि तीखी गर्मी के दिनों में सीधे धूप में न जाएं, प्यास न लगने पर भी पानी पीते रहें और हल्के रंग के कपड़े पहनें इत्यादि। संभव हो, तो बाहर काम करने वाले श्रमिक दिन के सबसे गर्म घंटों में देर तक काम करने से बचें। शहरी या जिलास्तरीय प्राधिकरणों को कार्य दिन के अलग-अलग घंटों में बांट देने चाहिए। गर्मी को लेकर मौसम विभाग के आ रहे पूर्वानुमानों के आधार पर वह स्पष्ट है कि हम अपनी तैयारियों को मजबूत करने के लिए तेज गर्मी शुरू होने का इंतजार नहीं कर सकते। 2024 में चली लू जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले भविष्य की एक संकेत मानी जा सकती है। भीषण गर्मी से अनुकूलन के लिए प्रभावी कार्रवाई की प्रक्रिया तेज करनी होगी। देखा जा रहा है कि कंक्रीटों का इस्तेमाल ज्यादा हो रहा है और पेड़ पौधा अधिक कटा जा रहा है। तो मैं सरकार से भी अपील करता हूं कि पेड़ की कटाव को रोक जाए। हमने देखा है कि सड़के बनाने के लिए लगातार पेड़ की कटाई हो रही है कहीं कहीं तो दो वर्ष पहले पौधा लगाया गया है और रोड की चौड़ीकरण में उसे नष्ट कर दिया गया, यह बहुत दुःख की बात है। हम आने वाले समय में ऑक्सीजन की संकट से जूझेंगे और पानी बिना तड़पेंगे। तो सावधानी बरतने की जरूरत है और अभी से ही जागने की जरूरत है।आज आप सभी को सुचित करता हूं कि पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी मुफ़्त पौधा वितरण किया जाएगा और जीतना हो सके पौधा लगाने में मदद किया जाएगा। सुमित कुमार ✍️🙏District Administration Patna Narendra Modi Nitish Kumar News18 Bihar Patna Police Bihar Police Environmental Working Group Dr Mamtamayi Priyadarshini Aaj Tak Sashastra Seema Bal - SSB FTR HQR SSB PATNA Ministry of Jal Shakti, Department of Water Resources, RD & GR Ministry of Jal Shakti, Department of Water Resources, RD & GR group Niraj Kumar Singh #everyone #brothersofbihar #cmobihar #Bihar #बिहार #patna #today #news
वक्त से पहले गर्मी के तीखे तेवर और हमारी तैयारी,
इस वर्ष भी बांटे जाएंगे मुफ़्त पौधे।
गर्मी का समय से पहले आना और तापमान का अधिक रहना अब 'न्यू नॉर्मल', यानी नई सामान्य स्थिति बनती जा रही है। बिहार का आलम यह है कि अभी से ही तापमान के तेवर दिखने लगा है। मौसम विभाग के मुताबिक, वर्ष 2024 भारत के इतिहास का सबसे गर्म साल। मार्च व अप्रैल में भी सामान्य से अधिक तापमान रहने और सामान्य से अधिक दिनों तक लू चलने का अनुमान लगाया गया है, जो गर्मी के लिहाज से एक और मुश्किल साल का संकेत है। जाहिर है, नई परिस्थिति से निपटने के लिए हमें त्रिआयामी प्रयास करने होंगे।
सबसे पहले, सभी शहरों, जिलों व राज्यों को वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित हीट एक्शन प्लान बनाने चाहिए। लगभग 97 प्रतिशत मौजूदा हीट एक्शन प्लान में उच्च तापमान से जुड़े जोखिम का विस्तृत आकलन नहीं किया गया है, जैसे कि किसी शहर में प्राथमिकता के आधार पर काम करने की जरूरत वाले वाडाँ अनुमान को चिह्नित नहीं किया गया है। भीषण गर्मी वाली जगहों (हॉट स्पॉट), शहरी निर्माण, ग्रीन कवर (हरियाली) के साथ-साथ सामाजिक-आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधित खतरों के आधार पर सरकारों को अपनी प्राथमिकता तय करनी होगी।
भीषण गर्मी के अनुकूल बनने के लिए परखे हुए विस्तृत उपायों को अपनाने और आर्थिक मदद की व्यवस्था मजबूत बनाने की भी जरूरत है। गर्मी से बचाने की रणनीतियां प्रभावी रहें, इसके लिए जरूरी है कि हीट एक्शन प्लान स्थानीय संदर्भ में उपयोगी समाधानों- जैसे शहरी हरियाली, स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार, समय-पूर्व चेतावनी और छत को ठंडा रखने आदि- को अपनाने के लिए संभावित वित्त-पोषण की स्पष्ट जानकारी भी उपलब्ध कराए। इसके लिए केंद्र सरकार की अमृत और मनरेगा जैसी योजनाओं या शहरों के व्यावसायिक संस्थानों के कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व हो
मौसम विभाग के संकेत हैं कि तैयारियों को हम अपनी मजबूत करने के लिए तेज गर्मी शुरू होने का इंतजार नहीं कर सकते। राज्य सरकारें लू को 'स्थानीय संदर्भ' में आपदा मान भी लेती हैं, तब भी वे कुल डिजास्टर रिस्पांस फंड का सिर्फ 10 प्रतिशत हिस्सा खर्च कर सकती हैं। ऐसे में, गर्मी के कारण काम छोड़ने को मजबूर होने वाले लोगों, विशेष रूप से खुली जगह में काम करने वाले श्रमिकों की आजीविका को बचाने के लिए आर्थिक मदद अनिवार्य है। बीते साल हमने 18 हज़ार से अधिक पौधा लगवाया था और बहुत से लोगों ने ग्रीन विलेज का निर्माण में अहम भूमिका निभाई थी। ऐसे प्रयासों को और अधिक विस्तार देना चाहिए। जिसमें हमे राज्य सरकार और तमाम जनप्रतिनिधियों और जनता से सहयोग की जरूरत है।
तमाम नागरिकों से अनुरोध है कि तीखी गर्मी के दिनों में सीधे धूप में न जाएं, प्यास न लगने पर भी पानी पीते रहें और हल्के रंग के कपड़े पहनें इत्यादि। संभव हो, तो बाहर काम करने वाले श्रमिक दिन के सबसे गर्म घंटों में देर तक काम करने से बचें। शहरी या जिलास्तरीय प्राधिकरणों को कार्य दिन के अलग-अलग घंटों में बांट देने चाहिए।
गर्मी को लेकर मौसम विभाग के आ रहे पूर्वानुमानों के आधार पर वह स्पष्ट है कि हम अपनी तैयारियों को मजबूत करने के लिए तेज गर्मी शुरू होने का इंतजार नहीं कर सकते। 2024 में चली लू जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले भविष्य की एक संकेत मानी जा सकती है। भीषण गर्मी से अनुकूलन के लिए प्रभावी कार्रवाई की प्रक्रिया तेज करनी होगी। देखा जा रहा है कि कंक्रीटों का इस्तेमाल ज्यादा हो रहा है और पेड़ पौधा अधिक कटा जा रहा है। तो मैं सरकार से भी अपील करता हूं कि पेड़ की कटाव को रोक जाए। हमने देखा है कि सड़के बनाने के लिए लगातार पेड़ की कटाई हो रही है कहीं कहीं तो दो वर्ष पहले पौधा लगाया गया है और रोड की चौड़ीकरण में उसे नष्ट कर दिया गया, यह बहुत दुःख की बात है। हम आने वाले समय में ऑक्सीजन की संकट से जूझेंगे और पानी बिना तड़पेंगे। तो सावधानी बरतने की जरूरत है और अभी से ही जागने की जरूरत है।
आज आप सभी को सुचित करता हूं कि पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी मुफ़्त पौधा वितरण किया जाएगा और जीतना हो सके पौधा लगाने में मदद किया जाएगा।
सुमित कुमार ✍️🙏
District Administration Patna Narendra Modi Nitish Kumar News18 Bihar Patna Police Bihar Police Environmental Working Group Dr Mamtamayi Priyadarshini Aaj Tak Sashastra Seema Bal - SSB FTR HQR SSB PATNA Ministry of Jal Shakti, Department of Water Resources, RD & GR Ministry of Jal Shakti, Department of Water Resources, RD & GR group Niraj Kumar Singh
#everyone #brothersofbihar #cmobihar #Bihar #बिहार #patna #today #news
Comments
Post a Comment